2015-06-02 11:48:00

प्रेरक मोतीः शहीद सन्त मारसेलीनुस एवं शहीद सन्त पीटर (चौथी शताब्दी) (02 जून)


वाटिकन सिटी, 02 जून सन् 2015:

रोमी सम्राट दियोक्लेशियन के युग के शहीद सन्त मारसेलीनुस एवं शहीद सन्त पीटर के बारे में, हालांकि, हमें बहुत कम जानकारी है तथापि इतना तो सच है कि आरम्भिक कलीसिया में इन दोनों शहीदों की भक्ति की जाती थी। इनके प्रति सम्मान भाव का सबूत हमें कॉन्सटेनटाईन स्थित महागिरजाघर में मिलता है जहाँ इनकी समाधियाँ हैं। इसके अतिरिक्त, यूखारिस्त की प्रथम प्रार्थना में भी इन शहीदों का नाम लिया जाता है।  

सन्त पापा दामासुस कहा करते थे कि उन्होंने इन दो शहीदों के बारे में इनके जल्लाद से सुना था जिसने बाद में मनपरिवर्तन कर ख्रीस्तीय धर्म का आलिंगन कर लिया था। मारसेलीनुस एक पुरोहित थे तथा सन्यासी पीटर, प्रार्थना द्वारा, अपदूतों से लोगों को मुक्ति दिलाया करते थे। इन दोनों को, प्रभु ख्रीस्त में उनके विश्वास के कारण, सन् 304 ई. में प्राणदण्ड दे दिया गया था। इनकी शहादत की कहानी के अनुसार, इन्होंने अपने कारावासी जीवन को सुसमाचार प्रचार के मौके के रूप में देखा तथा क़ैद में रहते हुए, कारावास के जेलर तथा उसके परिवार का मनपरिवर्तन करने में सफल हुए। यह भी कहा जाता है कि मारसेलीनुस एवं पीटर को दूर जंगल में ले जाकर मार डाला गया था ताकि अन्य ख्रीस्तीय धर्मानुयायी उनकी दफन क्रिया न कर सकें तथा उनके अवशेषों की भक्ति में न लगें। तथापि, दो महिलाओं ने इनके शवों को पाया तथा उचित रीति से उनकी अन्त्येष्टि कर उन्हें दफनया। रोम शहर के शहीद सन्त मारसेलीनुस तथा सन्त पीटर का स्मृति दिवस 2 जून को मनाया जाता है। 

चिन्तनः धर्मियों! प्रभु में आनन्द मनाओ! स्तुतिगान करना भक्तों के लिए उचित है। वीणा बजाते हुए प्रभु का धन्यवाद करो, सारंगी पर उसका स्तुतिगान करो। उसके आदर में नया गीत गाओ, मन लगा कर वाद्य बजाओ। प्रभु का वचन सच्चा है, उसके समस्त कार्य विश्वसनीय हैं। प्रभु को धार्मिकता और न्याय प्रिय हैं; पृथ्वी उसकी सत्यप्रतिज्ञता से परिपूर्ण है" (स्तोत्र ग्रन्थ 33: 1-5)। 








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