कोरिया में संत पापा की प्रेरितिक यात्रा का प्रतीक एवं आदर्श वाक्य
वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार 10 अप्रैल 2014 (वीआर सेदोक): कोरिया में 14 से 18 अगस्त को
संत पापा फ्राँसिस की आगामी प्रेरितिक यात्रा का प्रतीक एवं आदर्श वाक्य प्रकाशित कर
दिया गया है। आदर्श वाक्य है, "उठ कर प्रकाशमान हो जा! क्योंकि तेरी ज्योति आ रही
है और प्रभु-ईश्वर की महिमा तुझ पर उदित हो रही है।"(इसा.60:1) कोरिया के काथलिक
धर्माध्यक्षीय सम्मेलन की आयोजक समिति के प्रतिनिधियों ने प्रेरितिक यात्रा का प्रतीक
एवं आदर्शवाक्य वाटिकन में 8 अप्रैल को प्रस्तुत किया। प्रतीक चिन्ह में दो आग की
लपटें एक-दूसरे से जुड़ी हैं उनमें एक का रंग नीला एवं दूसरा लाल है जिसे लहरों से उठता
हुआ दिखाया गया है। दोनो रंग दो कोरियाई देशों का प्रतीक है तथा उनका एक-दूसरे से जुड़ा
होना दोनो देशों की एकता के उद्देश्य पर बल देता है। नीली लहरें जो चाकू के समान दिखायी
गयीं हैं कोरियाई कलीसिया के बलिदान का प्रतीक हैं। नीला रंग सागर सदृश्य ईश्वर की करूणा
को दर्शाता है। संत पापा की कोरिया में प्रेरितिक यात्रा के दो मुख्य कारण हैं: पहला,
छटवां एशियाई विश्व युवा दिवस तथा दूसरा, विश्वास के खातिर 124 कोरियाई शहीदों की धन्य
घोषणा। मालूम हो कि धन्य संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने 25 वर्षों पूर्व कोरिया की प्रेरितिक
यात्रा की थी। एशिया एक ऐसा महाद्वीप है जहाँ ख्रीस्तीय समुदाय बहुत तेजी से बढ़ रहा
है।