2011-02-16 12:54:02

वारीय - आमदर्शन समारोह के अवसर पर
संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें का संदेश
16 फरवरी, 2011




वाटिकन सिटी, 16 फरवरी, 2011 (सेदोक, वीआर) बुधवारीय आमदर्शन समारोह में संत पापा बेनेदिक्त सोलहवें ने संत पापा पौल षष्टम् सभागार में एकत्रित हज़ारों तीर्थयात्रियों को विभिन्न भाषाओं में सम्बोधित किया।


उन्होंने अंग्रेजी भाषा में कहा- मेरे अति प्रिय भाइयो एवं बहनों, आज की धर्मशिक्षामाला में संत जोन द क्रॉस के जीवन पर मनन-चिन्तन करें। जोन का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था।

अपने युवाकाल ही उन्होंने कारमेल धर्मसमाज में प्रवेश किया और आगे चलकर एक कारमेलाइट पुरोहित के रूप में अभिषिक्त हुए। पुरोहित बनने के बाद उसकी मुलाक़ात अविला की तेरेसा से हुई।

यह मुलाक़ात कारमेल धर्मसमाज और लोगों के लिये हितकारी सिद्ध हुई । दोनों ने मिलकर कारमेलाइट धर्मसमाज में सुधार लाने का बीड़ा उठाया।
जोन तेरेसा के मठ में पापस्वीकार संस्कार के लिये कोनफेसर का कार्य करते हुए आध्यात्मिक जीवन में होने वाले ईश्वरीय क्रियाकलापों पर चिन्तन कर उसे लिपिबद्ध किया।

अपने धर्मसमाज की ओर से होने वाली नामसझी और प्रताड़नाओं के बावजूद जोन ने जो रचनायें लिखीं वे पश्चिम की आध्यात्मिक रचनाओं में व्यवहारिक और उत्कृष्ट ग्रंथों के रूप में मान्यता प्राप्त हैं।

जोन की चार आध्यात्मिक किताबें आज भी बहुत प्रसिद्ध हैं वे हैं ‘दि एशेन्ट ऑफ माउन्ट कारमेल’, ‘द डार्क नाईट ऑफ द सोल’, ‘द स्पीरिचुअल कैन्टिकल’, और ‘द लिविंग फ्लेम ऑफ लव’।

जिस विषयवस्तु पर जोन ऑफ द क्रॉस ने लगातार अपने विचार व्यक्त किये वह था आत्मा का शुद्धिकरण। वे चाहते थे कि लोग सृष्ट वस्तुओं से ही अपनी आत्मा को शुद्ध करें।

वे कहा करते थे कि हम जीवित ईश्वर की छाप सृष्टि में ही खोजा जा सकता है। जोन ने कहा था ईश्वर के सत्य को पाने के लिये विश्वास ही सबसे उत्तम साधन है। उन्होंने बताया कि आत्मा को शुद्ध करने की प्रक्रिया कठिन है - कभी सक्रिय तो कभी निष्क्रिय भी ।

इसके लिये चाहिये ईश्वर को जीवन के केन्द्र में रखकर मजबूत मनोबल के साथ खुद को नम्रतापूर्वक दयालु ईश्वर के हाथों सौंप देना। इस तरह से जोन हमारे लिये आध्यात्मिकता के मार्ग में नम्रतापूर्ण समर्पण, वफ़ादारी और धैर्य के आदर्श हैं।


इतना कहकर संत पापा ने अपना संदेश समाप्त किया।

उन्होंने संत बेनदिक्त स्कूल, संत अलोयसियुस कॉलेज, सेंट पैट्रिक ग्रामर स्कूल, अमेरिका और देश-विदेश से आये तीर्थयात्रियों और उनके परिवार के सदस्यों पर प्रभु की कृपा और शांति की कामना करते हुए उन्हें अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।









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